शामली। शहर के सरस्वती बालिका विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में महान दार्शनिक एवं वेदांत चिंतक स्वामी रामतीर्थ की जयंती श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। इस अवसर पर आयोजित विशेष प्रार्थना सभा एवं विचार गोष्ठी में छात्राओं को स्वामी रामतीर्थ के जीवन दर्शन, राष्ट्रभक्ति और समाज सुधार के लिए किए गए कार्यों से अवगत कराया गया। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान प्राप्त करना नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, संस्कार और चरित्र का निर्माण करना भी है। छात्राओं ने स्वामी रामतीर्थ के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।
विद्यालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ स्वामी रामतीर्थ के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। छात्राओं और शिक्षक-शिक्षिकाओं ने उन्हें नमन करते हुए उनके विचारों और समाज के प्रति योगदान को याद किया।
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता विद्यालय की आचार्या अनीता ने स्वामी रामतीर्थ के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका जीवन राष्ट्रभक्ति, आत्मज्ञान, त्याग और परमार्थ की प्रेरणादायक मिसाल है। उन्होंने भारतीय संस्कृति और वेदांत दर्शन का संदेश देश की सीमाओं से बाहर भी पहुंचाया। अमेरिका और जापान सहित विभिन्न देशों में भारतीय आध्यात्मिक विचारों के प्रचार-प्रसार में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।
उन्होंने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि स्वामी रामतीर्थ शिक्षा को आत्मविश्वास और आत्मसम्मान जागृत करने का माध्यम मानते थे। वर्तमान समय में युवा पीढ़ी को उनके एकाग्रता, कठिन परिश्रम और सर्वजन हिताय के सिद्धांतों को आत्मसात करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि केवल पुस्तकीय ज्ञान प्राप्त कर लेना ही शिक्षा का उद्देश्य नहीं है, बल्कि अच्छे संस्कार, सकारात्मक सोच और श्रेष्ठ चरित्र का निर्माण भी उतना ही आवश्यक है।
कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के प्रधानाचार्य रविंद्र कुमार ने आचार्या अनीता के विचारों की सराहना की। उन्होंने छात्राओं को स्वामी रामतीर्थ के आदर्शों से प्रेरणा लेकर जीवन में अनुशासन, परिश्रम और राष्ट्रसेवा की भावना विकसित करने के लिए प्रेरित किया। साथ ही छात्राओं को महापुरुषों के दिखाए मार्ग पर चलने का संकल्प दिलाया।
इस अवसर पर विद्यालय का समस्त स्टाफ और छात्राएं उपस्थित रहीं।






