कैराना। औद्योगिक इकाइयों से फैल रहे कथित प्रदूषण के खिलाफ कण्डेला में ग्रामीणों का सब्र जवाब दे गया। वर्षों से स्वच्छ हवा और पानी के लिए संघर्ष कर रहे ग्रामीण मंगलवार को सड़कों पर उतर आए और अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि फैक्ट्रियों से निकलने वाला प्रदूषण आसपास के गांवों में गंभीर बीमारियों की वजह बन रहा है। लगातार शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से नाराज ग्रामीणों ने दो टूक चेतावनी दी है कि जब तक प्रदूषण की समस्या का स्थायी समाधान नहीं होता, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा।
मंगलवार को शामली-कैराना मार्ग पर गांव कण्डेला के बस स्टॉप के निकट ग्रामीण दरा बिछाकर धरने पर बैठ गए। धरने में राहुल चौहान, अमरीश कोरी, अमित चौहान, चरणसिंह चौहान, वैसर प्रधान, गुरदीप चौहान, कुलदीप राणा, अंकित चौहान, रूपेश चौहान, गौरव, नितिन, प्रवीण, कान्हा, सागर, बादल, आजाद और अंकुर समेत अनेक ग्रामीण शामिल रहे। प्रदर्शनकारियों ने औद्योगिक क्षेत्र में संचालित फैक्ट्रियों से होने वाले वायु एवं भूजल प्रदूषण पर तत्काल अंकुश लगाने की मांग उठाई।
आठ गांवों में गंभीर बीमारियां फैलने का आरोप
धरनारत ग्रामीणों का आरोप है कि कण्डेला औद्योगिक क्षेत्र में संचालित फैक्ट्रियों से निकलने वाले प्रदूषित तत्वों का असर आसपास के कण्डेला, हिंगोखेड़ी, शेखूपुरा, जगनपुर, भूरा, मन्नामाजरा, ऐरटी और बलवा गुजरान समेत कई गांवों पर पड़ रहा है। ग्रामीणों का दावा है कि क्षेत्र में दमा, अस्थमा, कैंसर, पथरी और काला पीलिया जैसी गंभीर बीमारियों के मामले बढ़ रहे हैं। कई लोग इन बीमारियों के चलते असमय जान गंवा चुके हैं। हालांकि, इन बीमारियों और औद्योगिक प्रदूषण के बीच सीधे संबंध की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं, जांच प्रक्रिया पर उठाए सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि प्रदूषण की समस्या को लेकर फैक्ट्री संचालकों से कई बार वार्ता की जा चुकी है। जिले के उच्चाधिकारियों से लेकर प्रदूषण नियंत्रण विभाग के स्थानीय कार्यालय और लखनऊ स्थित कार्यालय तक लिखित शिकायतें भेजी गईं, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। आरोप लगाया कि जांच के लिए आने वाली टीमें धरातल पर वास्तविक स्थिति का आकलन करने के बजाय औपचारिकताएं पूरी करके फैक्ट्री संचालकों को क्लीन चिट दे देती हैं। ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच और प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की मांग की है।
समाधान के बिना नहीं उठेंगे धरने से ग्रामीण
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि स्वच्छ हवा और शुद्ध पेयजल मिलना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है। प्रदूषण के कारण क्षेत्र के लोगों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। बार-बार गुहार लगाने के बावजूद सुनवाई नहीं होने पर धरना शुरू करने का निर्णय लिया गया है। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा, बल्कि धरातल पर प्रभावी कार्रवाई होने के बाद ही आंदोलन समाप्त किया जाएगा।

पुलिस ने दिया एक सप्ताह का आश्वासन, नहीं बनी सहमति
वहीं, सदर कोतवाली प्रभारी निरीक्षक मुकेश कुमार ने बताया कि धरनारत ग्रामीणों से वार्ता के लिए पुलिस टीम मौके पर पहुंची थी। ग्रामीणों को एक सप्ताह के भीतर समस्या के समाधान का आश्वासन दिया गया, लेकिन फिलहाल वार्ता किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी है। इसके चलते ग्रामीणों का अनिश्चितकालीन धरना जारी है।






